काशी में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने गिनाई सरकार की उपलब्धि

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद सोमवार को पहली बार बाबा विश्वनाथ की नगरी वाराणसी पहुंचे थे। यहां पहुंचकर उन्होंने अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करते हुए कहा कि काशी पहली बार आना मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है। निरंतर अस्तित्व में बनी रहने वाली विश्व की सबसे प्राचीन नगरी वाराणसी प्राचीन परम्पराओं को निभाते हुए ‘स्पिरिचुअल सिटी’ से आज ‘स्मार्ट सिटी’ बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।राष्ट्रपति ने कहा कि वाराणसी को आर्थिक विशेष क्षेत्र स्पेशल इकोनामिक जोन (एसई

जेड) बनाने के लिए सरकार इन्फ्रास्ट्रक्च र तथा कनैक्टिविटी पर विशेष ध्यान दे रही है।
उन्होंने कहा कि वाराणसी में प्राचीन भारत से लेकर इक्कीसवीं सदी के भारत को एक ही साथ देखा जा सकता है। यहां एक तरफ आप सब वैदिक-कर्मकांड और गंगा-आरती देखते हैं तो दूसरी ओर आईआईटी-बीएचयू तथा अन्य संस्थानों में आधुनिकतम प्रयोगशालाओं में अनुसंधान कार्य चल रहे होते हैं।राम नाथ कोविंद सोमवार को लालपुर स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। इस मौके पर उन्होंने भारत राष्ट्रीय राजपथ प्राधिकरण (एनएचएआई) की पांच परियोजनाओं की आधारशिलाएं रखी। उन्होंने कहा कि यह योजनाएं वाराणसी और आस-पास के क्षेत्र की यातायात सुविधा को मजबूत एवं सुगम बनाएंगी जिससे आम जनता का जीवन आसान बनेगा। इस मौके पर राष्ट्रपति ने कौशल विकास मिशन के तहत प्रशिक्षित 10 युवाओं को विभिन्न कंपनियों की ओर से नियुक्ति पत्र भी सौंपे।

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा कि प्राचीन काल से वाराणसी ने उत्तर भारत और पूर्व भारत को गंगा जलमार्ग तथा सड़क मार्ग से जोड़े रखा है। गंगा नदी ने नगर तथा क्षेत्र की संस्कृति, सभ्यता, व्यापार और विकास में विशेष योगदान दिया है। आज इस भावना के नवीनीकरण की आवश्यकता है। राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-1, पूर्व मालवाहक गलियारा तथा विभिन्न राजमार्ग परियोजनाओं के माध्यम से वाराणसी पूर्वी भारत के लिए उत्तर भारत का द्वार है। उन्होंने कहा कि वाराणसी को आर्थिक विशेष क्षेत्र बनाने के लिए सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर तथा कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दे रही है

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