बड़े पर्दे पर ‘फिल्लौरी’ और ‘अनारकली ऑफ़ आरा’

हर शुक्रवार को इंतज़ार होता है नई फिल्मों का। इस बार फिल्लौरी और अनारकली ऑफ़ आरा बड़े परदे पर आ रही हैं। दोनों ही फिल्में एक दूसरे से बिल्कुल अलग हैं।
फ़िल्म फिल्लौरी में अनुष्का शर्मा ने एक भूत यानि आप कह सकते हैं कि एक भूतनी का रोल अदा किया है। एनआरआई कानन यानि सूरज शर्मा अपनी बचपन की प्रेमिका अनु से शादी करने के लिए भारत आता है। कुंडलियां देखी जाती हैं। पता चलता है कि कानन मांगलिक है। इसलिए पहले उसे पेड़ से शादी करनी होगी।

बेचारे कानन को पता नहीं था कि जिस पेड़ से उसने शादी की है उस पर एक आत्मा शशि यानि अनुष्का शर्मा रहती है। कानन के पीछे शशि लग जाती है।

फ़िल्म के एक हिस्से में अनुष्का और दिलजीत दोसांझ की लव-स्टोरी है, तो दूसरे पार्ट में अनुष्का भूतनी दुल्हन बनी नज़र आ रही हैं। अनशई लाल के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म को अनुष्का और उनके भाई करनेश शर्मा ने प्रोड्यूस किया है।

‘निल बटे सन्नाटा’ के बाद ‘अनारकली ऑफ़ आरा’ स्वरा भास्कर की बेहद महत्वाकांक्षी सोलो फिल्म है। इस फिल्म में उन्होंने एक आम गायिका का किरदार निभाया है। फिल्म के निर्देशक और लेखक अविनाश दास इससे पहले प्रिंट और टीवी के पत्रकार भी रह चुके हैं।

अनारकली में स्वरा भास्कर के अलावा संजय मिश्रा, पंकज त्रिपाठी और इश्तियाक़ ख़ान महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं और फिल्म का संगीत रचा है रोहित शर्मा ने।

यह फिल्म एक सोशल म्यूजिकल ड्रामा है। अनारकली बिहार की राजधानी पटना से 40 किलोमीटर दूर आरा शहर की एक देसी गायिका है, जो मेलो-ठेलों, शादी-ब्याह और स्थानीय आयोजनों में गाती हैं। फिल्म की कहानी में एक ऐसी घटना होती है, जिससे उसकी जिंदगी ही बदल जाती है।

अनारकली के गीत लोगों के मन के दबे हुए तार छेड़ते हैं और अनारकली अपने प्रति लोगों की दीवानगी को अपनी संगीत यात्रा से मंत्रमुग्ध कराती है। वह एक तेवर रखती है और उसे जमाने की परवाह नहीं है, लेकिन रिश्तों के मामले में संवेदनशील है।

फिल्म में उसके इर्द-गिर्द कुछ लोग हैं जो उसके प्रेम के एक ही धागे में बंधे हैं। लेकिन आखिर में अनारकली को अकेले ही अपने रास्ते पर जाना है। पूरी कहानी में कठिन से कठिन मौकों पर उसकी आंखें आंसू नहीं बहाती।