लालू को लगा बड़ा झटका, चारा घोटाले के चौथे मामले में कोर्ट ने सुनाई सजा

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को कोर्ट की तरफ से बड़ा झटका लगा है। चारा घोटाले के चौथे मामले में आज झारखंड हाई कोर्ट द्वारा उन्हें 7 साल की सजा सुनाई गई है। इसके अलावा उनपर 30 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। दुमका ट्रेजरी घोटाले से संबंधित इस मामले की सुनवाई आज की गई, जिसमे लालू दोषी पाए गए। लालू पहले ही झारखंड की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं। इससे पहले उन्हें कुल तीन मामलों में साढ़े 13 साल की सजा सुनाई जा चुकी है। ऐसे में अब इसमें 7 सालों का और इजाफा होने से उन्हें कुल 20 साल 6 महीने की सजा काटनी होगी।विवादों से लालू यादव का पुराना रिश्ता रहा है। इससे पहले भी उनपर कई तरह के विवादों का आरोप लग चुका है। लालू यादव पर जमीन घोटाला, ऑडियो टेप मामला, चारा घोटाला, शॉपिंग मॉल निर्माण मामला, मिट्टी घोटाला, उनकी बेटी मीसा पर भी बेनामी संपत्ति मामला विवादित मामले हैं।

1996 में लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाले का आरोप लगा था जिसने बिहार की राजनीति को गर्मा दिया था। उस वक्त बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव ही थे और उन्हें इस घोटाले में मुख्य अभियुक्त बनाया गया है। पशुओं को खिलाए जाने वाले चारे के नाम पर सरकारी खजाने में बड़ स्तर का फर्जीवाड़ा हुआ था।

खबरों के मुताबिक, ये घोटाला करीब 900 करोड़ रुपए का है। 1997 में उन्हें घोटाले के आरोप में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर जेल जाना पड़ा था। इस मामले में दोषी करार दिए जाने पर उन्हें लोकसभा से भी अयोग्य घोषित कर दिया गया था।

आज इसी घोटाले के चौथे मामले में लालू को कोर्ट द्वारा 7 साल की सजा सुनाई गई है।
19 अभियुक्त दोषी करार
लालू प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री फूलचंद सिंह, तत्कालीन सचिव, नंद किशोर प्रसाद, तत्कालीन वेटनरी ऑफिसर, ओपी दिवाकर, तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक, पंकज मोहन भुई, तत्कालीन एकाउंटेंट, पितांबर झा, तत्कालीन वेटनरी ऑफिसर, केके प्रसाद, तत्कालीन वेटनरी ऑफिसर, रघुनाथ प्रसाद, तत्कालीन वेटनरी ऑफिसर, राधा मोहन मंडल, तत्कालीन वेटनरी ऑफिसर, एसके दास, तत्कालीन असिस्टेंट, अरुण कुमार सिंह, पार्टनर विश्वकर्मा एजेंसी, अजित कुमार शर्मा, प्रोपराइटर लिटिल ओक, विमल कांत दास, तत्कालीन वेटनरी ऑफिसर, गोपी नाथ दास, प्रोपराइटर, राधा फार्मेसी, एमएस बेदी, प्रोपराइटर सेमेक्स क्रायोजेनिक्स, नरेश प्रसाद, प्रोपराइटर वायपर कुटीर, राजकुमार शर्मा, ट्रांसपोर्टर, आरके बगेरिया, ट्रांसपोर्टर, मनोजरंजन प्रसाद। इन लोगों को दोषी ठहराने के अलावा 12 आरोपियों को बरी भी किया गया है।

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