देश के आर्थिक हालात पर घमासान, जेटली ने सिन्हा को 80 साल की उम्र में नौकरी चाहने वाला कहा, तो जवाब में सिन्हा ने कहा- अगर मैं नौकरी का उम्मीदवार होता तो जेटली वहाँ नहीं होते

देश के आर्थिक हालात पर घमासान, जेटली ने सिन्हा को 80 साल की उम्र में नौकरी चाहने वाला कहा, तो जवाब में सिन्हा ने कहा- अगर मैं नौकरी का उम्मीदवार होता तो जेटली वहाँ नहीं होते
देश के आर्थिक हालात पर घमासान, जेटली ने सिन्हा को 80 साल की उम्र में नौकरी चाहने वाला कहा, तो जवाब में सिन्हा ने कहा- अगर मैं नौकरी का उम्मीदवार होता तो जेटली वहाँ नहीं होते

राजनीतिक गलियारों में इन दिनों देश की आर्थिक हालात पर जमकर घमासान मचा हुआ है। बुधवार को एक लेख के जरिये पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने देश की आर्थिक हालात को खस्ता बताते हुए सारा दोष वित्तमंत्री अरुण जेटली पर जड़ दिया। जिसके बाद मोदी सरकार की काफी आलोचना शुरु हो गई, सरकार चारों तरफ से घिर गई।

सरकार का बचाव करने के लिए अरुण जेटली को खुद सामने आना पड़ा। गुरुवार को ‘INDIA @ 70, MODI @ 3.5’ के विमोचन पर आए वित्त मंत्री ने सिन्हा को 80 साल की उम्र में नौकरी चाहने वाला करार देते हुए कहा कि वह वित्त मंत्री के रूप में अपने रिकॉर्ड को भूल गए हैं। 2000 से 2003 तक वित्त मंत्री के तौर पर यशवंत सिन्हा का कार्यकाल बदतर था और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को उन्हें हटाना पड़ा था।

जेटली ने कहा कि देश में विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है। यशवंत सिन्हा जब वित्तमंत्री थे तो हमारे पास सिर्फ चार दिनों का विदेशी मुद्रा भंडार था। जोकि अब 4 बिलियन डॉलर हो गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि शुरू के दो महीनों में जीएसटी के संग्रह ने लक्ष्य को पूरा किया है और राजस्व में वृद्धि देखने को मिलेगी।

अरुण जेटली द्वारा बिना नाम लिये “80 की उम्र में नौकरी के उम्मीदवार” बताए जाने के बाद मंत्री यशवंत सिन्हा ने पटलवार करते हुए गुरुवार को कहा, “अगर मैं नौकरी का उम्मीदवार होता तो जेटली वहाँ होते ही नहीं।”

उन्होंने कहा, इसे मेरा निजी हमला बताना गलत है. अर्थव्यवस्था से जुड़ी समस्याओं के लिए वित्त मंत्री ही जिम्मेदार होंगे। इसके लिए गृहमंत्री पर आरोप नहीं लगाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा, मेरे बेटे को मेरे खिलाफ उतार कर इस मामले से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।

बता दें कि, जयंत सिन्हा ने टाइम्स ऑफ इंडिया में छपे अपने लेख में कहा था, “भारतीय अर्थव्यस्था के बदलते चेहरे पर हाल में कई लेख प्रकाशित हुए हैं। दुर्भाग्यवश, ये लेख सीमित तथ्यों पर आधारित हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था में मूलभूत बदलावों पर इनकी नजर नहीं जाती है। इतना ही नहीं एक या दो तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर और दूसरे आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था के मूल्याकंन के लिए काफी नहीं हैं। इनसे ढांचागत बदलावों के दीर्घकालीन प्रभावों का पता नहीं चलता।” 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के समय जयंत सिन्हा वित्त राज्य मंत्री बनाए गये थे। हालांकि बाद में कैबिनेट फेरबदल में उनका मंत्रालय बदल दिया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *