नवजोत सिद्धू को कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिया संभलने का मौका, एक्शन लिया पर बनाए रखा सम्मान

नई दिल्लीः मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नवजोत सिद्धू को संभलने का एक मौका दिया है। उन्होंने एक्शन तो लिया, पर विरोधी सिद्धू का सम्मान भी बनाए रखा। कैप्टन अमरिंदर सिंह और कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के बीच लंबे समय से चल रही जंग में कैप्टन की तरफ से सिद्धू को पहला झटका दिया गया।

सिद्धू से लोकल बॉडीज विभाग वापस लिए जाने से भले ही यह संकेत गया कि कैप्टन ने सिद्धू के पर कतर दिए हैं, लेकिन इस फैसले में भी कैप्टन ने एक अनुभवी, सह्रदय और सीनियर नेता के अपने रुतबे का ही परिचय दिया है। उन्होंने सिद्धू पर एक्शन लेते हुए भी इस बात का पूरा ध्यान रखा कि सिद्धू के सम्मान को ठेस न पहुंचे।

उन्होंने सिद्धू से एक बड़ा विभाग वापस लिया और दूसरे बड़े विभाग की जिम्मेदारी उन्हें सौंप दी। साफ है कि कैप्टन ने अपने अधीनस्थ बड़बोले मंत्री पर बदले की भावना से कार्रवाई नहीं की और उन्हें संभलने का पूरा मौका दिया है।

दरअसल, नवजोत सिद्धू को राहुल गांधी का करीबी माना जाता रहा है। कैप्टन के खिलाफ बार-बार की जाने वाली उनकी बयानबाजी की वजह भी यही मानी जाती रही कि सिद्धू जानते हैं कि पार्टी आलाकमान के निर्देशों के खिलाफ कैप्टन कोई कदम नहीं उठाएंगे। लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद परिस्थितियां बदली नजर आने लगी हैं।

कैप्टन द्वारा बठिंडा में पार्टी की हार का मुख्य कारण सिद्धू के बयान को ठहराए जाने के बाद सिद्धू फौरन दिल्ली गए परंतु दो दिन इंतजार करने के बावजूद राहुल गांधी ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया। वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह की ओर से देशभर के चुनाव परिणामों के उलट पंजाब में कांग्रेस को शानदार जीत दिलाने से पार्टी में उनकी छवि सबसे कद्दावर नेता की बन गई है।

इसमें संदेह नहीं कि पंजाब के मंत्रियों के विभागों में फेरबदल के उनके फैसले पर आलाकमान की ओर से पूरी सहमति दी गई। यानी सिद्धू लोकल बाडीज विभाग में लगातार अपनी उपलब्धियां गिनाकर भी विभाग पर कब्जा बरकरार नहीं रख सके। फिर भी, कैप्टन ने सिद्धू को बिजली विभाग जैसा बड़ा महकमा देकर उन्हें अपने साथ जोड़े रखने का बेहतरीन मौका दिया है।

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