अविश्वास प्रस्ताव को लेकर शुक्रवार को लोकसभा में चर्चा और वोटिंग,मोदी सरकार आशंकित नहीं

नई दिल्ली: संसद में मानसून सत्र के पहले दिन ही टीडीपी मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ले आयी ,जिसको चर्चा और वोटिंग के लिए लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया। अविश्वास प्रस्ताव को कांग्रेस सहित ज्यादातर विपक्षी दलों का समर्थन हासिल है। हालांकि इसके बावजूद सरकार इसे लेकर ज्यादा आशंकित नहीं है। उसके बेपरवाह होने के पीछे लोकसभा में सीटों का वो गणित है जिसमें उसे विपक्ष की तुलना में बहुमत हासिल है।
अविश्वास प्रस्ताव मोदी सरकार के लिए अग्निपरीक्षा की तरह है। लोकसभा में फिलहाल बीजेपी के पास अकेले 273 सांसद हैं। जबकि बहुमत के लिए उसे 272 सांसदों का आंकड़ा चाहिए। ऐसे में बीजेपी के पास बहुमत से एक सदस्य ज्यादा है। लेकिन मौजूदा समय में बीजेपी के कई सांसद बागी रुख अख्तियार किए हुए हैं। इनमें शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आजाद और सावित्री बाई फूले शामिल हैं।
अविश्वास प्रस्ताव पर बहस की तारीख मुकर्रर होने के साथ ही सबकी नजर उन पार्टियों पर है जो एनडीए में होते हुए भी सरकार को आंख दिखाती रही हैं। हालांकि शिवसेना ने कहा कि वो सरकार के साथ है।
545 सदस्यों वाली लोकसभा में मौजूदा समय में 535 सांसद हैं। यानी बीजेपी को बहुमत हासिल करने के लिए महज 268 सांसद चाहिए होंगे। बीजेपी के अभी 273 सदस्य हैं। इसके अलावा बीजेपी के सहयोगी दलों शिवसेना के 18, एलजेपी के 6, अकाली दल के 4 और अन्य के 9 सदस्य हैं। इस तरह से कुल संख्या 310 पहुंच रही है। ऐसे में बीजेपी को अविश्वास प्रस्ताव को गिराने और सरकार को बचाने में कोई दिक्कत नहीं होने वाली यानी बीजेपी को बहुमत हासिल करने के लिए महज 268 सांसद चाहिए होंगे। बीजेपी के अभी 273 सदस्य हैं। इसके अलावा बीजेपी के सहयोगी दलों शिवसेना के 18, एलजेपी के 6, अकाली दल के 4 और अन्य के 9 सदस्य हैं. इस तरह से कुल संख्या 310 पहुंच रही है। ऐसे में बीजेपी को अविश्वास प्रस्ताव को गिराने और सरकार को बचाने में कोई दिक्कत नहीं होने वाली।
यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से जब पूछा गया कि क्या आपके पास पर्याप्त नंबर हैं तो उनका जवाब था कि कौन कहता है कि हमारे पास नंबर नहीं हैं?

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