अपने 77 वें जन्मदिन पर गुजरात के नेता शंकर सिंह बघेला कुछ ऐसा घोषणा कर सकते हैं जो राज्य की राजनीति में चौकाने वाला होगा

नई दिल्ली | गुजरात के कांग्रेस नेता शंकर सिंह बघेला को लेकर राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा होने लगी है कि अपने 77 वें जन्म दिन पर बघेला कोई बड़ा फैसला सुना सकते हैं | ये बात तो तय है कि इस वक्त में बघेला के किसी भी फैसले का लाभ सिर्फ और सिर्फ भाजपा को ही मिलेगा | माना जा रहा है कि इस बार शंकर सिंह बघेला खुद को बतौर राज्य के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत करना चाहते थे ,लेकिन कांग्रेस हाई कमान ने उनकी एक नहीं सुनी|

दरअसल शंकर सिंह बघेला को बतौर मुख्यमंत्री पेश करके कांग्रेस अपने पैर पर कुल्हाड़ी नहीं मारना चाहती है क्यूंकि ऐसा हुआ तो राज्य के पुराने कांग्रेसी नेता नाराज हो जाएंगे| इधर कांग्रेस के साथ भी सांप -छुछुंदर वाला हाल है ,यदि पार्टी बघेला को इसी नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में घोषणा नहीं करते हैं तो कांग्रेस की राज्‍य यूनिट में विभाजन हो सकता है| पिछले दो दशक से राज्‍य की सत्‍ता से बाहर कांग्रेस की इस बार सत्‍ता में लौटने के मंसूबों पर पानी फिर सकता है|

आपको बता दूँ कि 1990 के दशक में गुजरात के मुख्‍यमंत्री रह चुके शंकर सिंह वाघेला गुजरात के उन नेताओं में गिने जाते हैं, जिनका अपना जनाधार है| पूरे गुजरात में उनके समर्थक फैले हुए हैं और पूरे राज्‍य में इस दौर के ‘बापू’ के नाम से वह मशहूर हैं| अपनी इसी छवि के चलते वह चाहते थे कि इस बार के चुनावों में कांग्रेस उनको मुख्‍यमंत्री पद का उम्‍मीदवार घोषित कर दे| लेकिन कांग्रेस ने ऐसा करने से इनकार कर दिया| कयास इस बात का भी लगाया जा रहा है कि यदि बघेला राजनीति से संन्यास लेते हैं तो मुमकिन है कि भाजपा उनके बेटे को राज्यसभा सदस्य बनाकर सदन में भेज दे | ऐसी संभावना इसलिए भी है लगायी जा रही है क्यूंकि बघेला से अमित शाह और मोदी के अच्छे सम्बन्ध हैं| कई बार दोनों एक दूसरे से मिले भी हैं | जो भी हो पर इस पुरे खेल में फायदा भाजपा के ही हिस्से आने वाली हैं |

 

 

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