इजरायल यहूदी राष्ट्र घोषित,इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने इसे ऐतहासिक मौका बताया

नई दिल्ली: इजरायल की संसद नेसेट ने गुरुवार को विवादित ‘ज्यूस नेशन बिल’ को कानून का दर्जा दे दिया गया। इसके मुताबिक, इजरायल अब यहूदी राष्ट्र होगा। अरबी से भी देश की आधिकारिक भाषा का दर्जा छिन गया है। ये भी कहा गया है कि अविभाजित येरुशलम, इजरायल की राजधानी होगी। संसद में पास बिल को देशहित में लिया गया फैसला बताया गया है। इजरायल का गठन 1948 में यहूदियों की धरती के तौर पर किया गया था। तब दुनियाभर के यहूदियों को फिलिस्तीन लौटकर अपनी खुद की जमीन पर हक जताने के लिए कहा गया था।
इजरायल के अरब सांसदों ने पास हुए नए बिल का विरोध किया है, वहीं प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे ऐतिहासिक मौका बताया। नेतन्याहू की दक्षिणपंथी सरकार है। इसके मुताबिक, “इजरायल ऐतिहासिक रूप से यहूदी लोगों का निवास स्थान है। सिर्फ उन्हें ही यहां राष्ट्रीयता का हक मिलना चाहिए।” संसद में बिल को पास होने में 8 घंटे लगे। पक्ष में 62 तो विपक्ष में 55 सांसदों ने वोटिंग की।
ज्ञात हो कि इजरायल की 90 लाख की आबादी में 20% (18 लाख) अरब (मुस्लिम) रहते हैं। इजरायल के कानून के मुताबिक, अरबों को भी वहां यहूदियों की तरह ही अधिकार दिए गए हैं लेकिन वे लंबे समय से दोयम दर्जे के नागरिकों की तरह बर्ताव होने और भेदभाव की शिकायतें करते रहे हैं।
दिसंबर में डोनाल्ड ट्रम्प ने अंतरराष्ट्रीय विरोधों को नजरअंदाज करते येरुशलम को इजरायल की राजधानी घोषित किया था।

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