केजरीवाल के 21 विधायक को सस्पेंड कराने वाले वक़ील को मिली जान से मारने की धमकी

नई दिल्ली: दिल्ली में लाभ के पद से जुड़े मामले में केजरीवाल सरकार के 20 विधायकों की सदस्यता ख़त्म हो गई है। इन विधायकों में अलका लांबा, कैलाश गहलौत, मदनलाल और नरेश यादव जैसे ‘आप’ नेता शामिल हैं। एडवोकेट प्रशांत पटेल की अर्ज़ी से शुरू हुए इस मुद्दे के अंजाम को उन्होंने भारत और उसके लोगो की जीत बताया है। पटेल ने ट्विटर पर टवीट कर बताया के उन्हें किसी तमक़ीन अहमद नामक व्यक्ति द्वारा धमकी दी गयी है तथा उन्होंने दिल्ली पुलिस व गृह मंत्रालय से सुरक्षा की मांग की है।

आपको बता दें की आप पार्टी के बागी नेता कपिल मिश्रा ने भी इस विषय में चिंता जताई है, उन्होंने कहा के पटेल को पूर्ण सुरक्षा मुहैया करानी चाहिए।

ये मामला साल 2015 के मार्च महीने से चल रहा है जब अरविंद केजरीवाल ने अपने 21 विधायकों को संसदीय सचिव के पद पर नियुक्त किया था।
चुनाव आयोग ने शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से इन विधायकों को 13 मार्च, 2015 से आठ सितंबर, 2016 के बीच ‘लाभ के पद’ के मामले में अयोग्य घोषित करने के लिए कहा था।
इसके बाद आज रविवार को इस बारे में केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी की है।
आख़िर क्या होता है ‘लाभ का पद’?
‘लाभ के पद’ का मतलब उस पद से है जिस पर रहते हुए कोई व्यक्ति सरकार की ओर से किसी भी तरह की सुविधा लेने का अधिकारी हो।
ओहदे के हिसाब से देखें तो संसदीय सचिव का कद किसी राज्य के मंत्री के बराबर होता है। इसके साथ ही संसदीय सचिव को मंत्री जैसी सुविधाएं भी मिल सकती हैं।

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