महागठबंधन में अंदुरुनी कलह -जेडीयू नेता केसी त्‍यागी के बयान के बाद महागठबंधन ज्यादा असहज |

महागठबंधन में अंदुरुनी कलह

नई दिल्ली : सियासत के मैदान में उलटफेर चलता रहता है | कब दोस्त दुश्मन और दुश्मन दोस्त बन जाए यह कहना मुश्किल है | इन दिनों बिहार की राजनीति में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है | सत्तारूढ़ महागठबंधन के दो शीर्ष नेता नीतीश कुमार और लालू यादव भले शांत बैठे हों लेकिन पार्टी के दूसरे नेताओं के तेवर देखने लायक है |

हालाँकि नीतीश और लालू ने अपनी पार्टी के प्रवक्ताओं को संयम से बयान देने की नसीहत दी लेकिन अभी भी अंदुरुनी हालत सामान्य नहीं है | जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी ने कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद के ख़िलाफ़ बोलते हुए यहां तक कह डाला कि अटल बिहारी वाजपेयी के समय उनकी पार्टी कभी एक सहयोगी के तौर पर असहज नहीं थी जिसका सीधा अर्थ ये माना गया कि वर्तमान महागठबंधन की सरकार में वो सहज नहीं महसूस कर रही |

इसके साथ ही नीतीश के क़रीबी और पूर्व विधान पार्षद संजय झा ने तो ग़ुलाम नबी आज़ाद के बयान पर यहां तक कह डाला कि इमरजेंसी के दौरान अपने सिद्धांत और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एक इंजीनियरिंग पास युवक को 19 महीने तक बक्सर और भागलपुर जेल में कैद रहना पड़ा | अभी कांग्रेस के नेता ने नीतीश कुमार के सिद्धांत को लेकर बयान दिया है | ये कांग्रेस के उसी यूथ ब्रिगेड के सदस्य हैं जो इमरजेंसी के दौरान सभी लोकतांत्रिक मूल्यों और सिद्धांतों को कुचलने में लगे थे. मैं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता को याद दिलाना चाहता हूं कि कांग्रेस और आप जैसे तत्कालीन युवा नेताओं के ‘सिद्धांत’ की वजह से ही नीतीश कुमार को भी देश के लाखों लोगों के साथ 19 महीने तक जेल में रहना पड़ा था |

लालू और नीतीश के दोनों करीबी नेता एवं प्रवक्ता अपने-अपने जहाँपनाह के हुक्म के बगैर ऐसा बयान देकर महागठबंधन को संकट में डालेंगे ये भी थोड़ा आश्चर्यजनक है , जो भी ये बात जग जाहिर हो चूका है कि महागठबंधन में ससब कुछ सामन्य नहीं है |

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