गुजरात में प्रधानमंत्री ने गाय के बहाने किस्से सुनाकर लोगों को अहिंसा के मार्ग पर चलने की नसीहत दी

साबरमती आश्रम में नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली |प्रधानमंत्री मोदी ने आज गाँधी के साबरमती आश्रम से देश के आम लोगों को अहिंशा के मार्ग पर चलने को कहा | गाय के नाम पर बढ़ती हिंसक घटनाओं पर दुख जताया है। गुरुवार को उन्होंने साबरमती आश्रम में कहा, “क्या हमें गाय के नाम पर किसी इंसान को मारने का हक मिल जाता है? क्या ये गो-भक्ति है? क्या ये गोरक्षा है? ये गांधीजी-विनोबाजी का रास्ता नहीं हो सकता। हम कैसे आपा खो रहे हैं? क्या गाय के नाम पर इंसान को मार देंगे?” मोदी ने देश में बढ़ती हिंसा के तीन उदाहरण भी दिए।

यही नहीं मोदी ने किस्से सुनते हुए लोगों से कहा कि मेरे जीवन की एक घटना है जिसे मैं लिखना चाहता था। मैं बालक था, गांव में मेरा घर एक छोटी सी गली में है। हमारे घर के सामने एक परिवार था, जो मजदूरी करता था। उनकी कोई संतान नहीं थी। परिवार में इसे लेकर तनाव रहता था। बहुत देर में उनके यहां संतान हुई।”
“संकरी गली थी, एक गाय रोज घरों के सामने आती थी। एक बार अचानक कोई हलचल हो गई। गाय दौड़ते-दौड़ते उस घर पास पहुंची। बच्चा दौड़ते हुए गाय के पैरों के नीचे आ गया। इतने साल बाद कोई बच्चा पैदा हुआ और उसकी मौत हो गई। आप सोच सकते हैं कि उस परिवार पर क्या बीती होगी। लेकिन दूसरे दिन सुबह ही वो गाय उनके सामने खड़ी हो गई। किसी भी परिवार से रोटी नहीं खाई। बस, वो उनके घर जाकर खड़ी हो गई। वहीं खड़ी रही, उसके आंसू नहीं रूके। 5 दिन वहां बिना खाए-पीए खड़ी रही।”

“परिवार को बेटे का दुख था, लेकिन गाय कई दिन तक वहीं खड़ी रही। उसके आंसू नहीं रुके। मोहल्ले के लोग और परिवार के लोग कोशिश करते रहे, लेकिन गाय ने अपना संकल्प नहीं छोड़ा। जिस बालक की मौत उसके पैरों के नीचे हुई, इस पीड़ा में उस गाय ने शरीर छोड़ दिया।” “एक परिवार के लिए गाय ने अपना शरीर छोड़ा। ये मुझे आज भी याद है। क्या किसी गाय को बचाने के लिए किसी को मारा जाए। अरे, कानून अपना नाम करेगा। देशवासियों से आग्रह करता हूं कि हिंसा किसी चीज का समाधान नहीं है। अगर हॉस्पिटल में किसी की मौत हो जाती है तो वो अकस्मात है।”

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