पूर्वोत्तर बने देश का विकास मॉडल – डॉ. जितेंद्र सिंह (केंद्रीय राज्य मंत्री)

नार्थ-ईस्ट अपने आप में ब्रांड है पर इस क्षेत्र को देश के विकास मॉडल के रूप में बनाने के सामूहिक प्रयास होने चाहिए। केंद्र सरकार नार्थ-ईस्ट के सार्वभौमिक विकास को लेकर प्रतिबद्ध है। क्षेत्र के विकास में धन की कमी नहीं होने दी जायेगी। पूरे क्षेत्र में 28 ऐसी गतिविधियों के केंद्र हैं जहाँ से पूरा देश सीख ले सकता है। यह न सिर्फ देश के लिए अच्छा होगा बल्कि यह नार्थ-ईस्ट के लोगों को बाकी भारत से मजबूती से जोड़ेगा। उक्त विचार भारत सरकार में  केंद्रीय राज्य मंत्री और नार्थ-ईस्ट विकास मंत्रालय के प्रभारी डॉ. जितेंद्र सिंह ने व्यक्त किये। मौका था नई दिल्ली में आजोयित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का जिसका विषय था “Transforming North East India”।

इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाज ओलिंपिक विजेता और राज्यसभा सांसद मैरीकॉम ने कहा कि नार्थ-ईस्ट ने देश को बेहतरीन खिलाड़ी दिए हैं। आज फीफा के अंडर-17 विश्व कप की भारतीय फुटबॉल टीम में अधिकाँश खिलाड़ी नार्थ-ईस्ट के हैं जिनके बारे में बहुत कम लोगों को पता है। नार्थ-ईस्ट के लोग  होटल इंडस्ट्री, शिक्षा, हॉस्पिटैलिटी जैसे कई क्षेत्रों में नए आयाम स्थापित कर सभी को अचंभित कर रहे हैं । नार्थ-ईस्ट भारत का नगीना है जिसकी राष्ट्र-व्यापी पहचान बहुत जरुरी है।

इस संगोष्ठी की आज की शुरुआत ‘पूर्वोत्तर के बारे में जागरूकता’ विषय के साथ हुई। प्रोफेसर शिवाजी सरकार ने कहा कि नार्थ-ईस्ट न केवल भारत के लिए बल्कि बांग्लादेश, म्यांमार और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। नार्थ-ईस्ट के लोगों में वह ताकत है कि वे शिक्षा और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में बेंगलुरु को भी पीछे छोड़ सकते हैं। अगरतला और गुवाहाटी से कोलकाता होते हुए बांग्लादेश को जोड़ता हुआ एक रेल कॉरिडोर इस क्षेत्र में विकास के नए आयाम जोड़ सकता है।

नीति आयोग के उपाध्यक्ष, श्री राजीव कुमार ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आयोग हर राज्य के लिए  उनकी समान और एकल जरूरतों के मुताबिक कार्य योजना बना रहा है और उनकी प्राथमिकता है किसानों की आय को दुगना करना। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों की इसके प्राकृतिक संसाधनों के कारण इसके विकास की अपार संभावना पर जोर दिया।

रामभाऊ प्रबोधिनी ट्रस्ट के चेयरमैन और राज्यसभा सांसद श्री विनय सहस्रबुद्धे ने कहा कि इस संगोष्ठी में हम नार्थ-ईस्ट की परेशानियों को ढूंढने या उनपर बहस करने नहीं आये हैं बल्कि हमें देश और नार्थ-ईस्ट को आगे ले जाने के प्रयासों और समाधानों पर ध्यान केंद्रित करना उद्देश्य है। भारत तब तक प्रगति के पथ पर अग्रसर नहीं हो सकता जब तक इसके प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण क्षेत्रों का विकास न हो। अतः यदि हमें देश का विकास चाहिए तो नार्थ-ईस्ट को विकसित करना ही होगा।

संगोष्ठी के सह-आयोजक हिमालयन विश्वविद्यालय, ईटानगर के चेयरमैन श्री हेमंत गोयल ने कहा कि विश्वविद्यालय ने यह तय किया है कि इस दो-दिवसीय संगोष्ठी में व्यक्त किये गए विचारों और समाधानों का क्रियान्वयन किये जाने की दिशा में प्रयास करेगा। वो चाहते तो शिक्षा-क्षेत्र में काम कर रहे बाकी लोगों की तरह किसी महानगर को अपने कार्य क्षेत्र के लिए चुन सकते थे, पर उन्होंने पूर्वोत्तर राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में काम करने की चुनौती को स्वीकार किया। वो चाहते हैं पूर्वोत्तर जल्द ही भारत के उच्च शिक्षा का केंद्र  बने।

इस दो-दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन ब्रिगेडियर (सेवानिवृत) बी.डी मिश्रा, राज्यपाल अरुणाचल प्रदेश ने कल किया था। संगोष्ठी को श्री मृदुल हज़ारिका (कुलपति, गुवाहाटी विश्वविद्यालय), श्री सी.के दास (उत्तर-पूर्व परिषद् के सदस्य) आदि गणमान्य विद्वानों ने सम्बोधित किया और पूर्वोत्तर में विकास की अपार संभावनाओं और सरकार की विकास उन्मुख नीतियों पर प्रकाश डाला।

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