चिराग पासवान पर पिता की विरासत आगे ले जाने की जिम्मेदारी

नई दिल्लीः चिराग पासवान बिहार के कद्दावर दलित नेता और केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के पुत्र हैं। चिराग ने पहले फिल्मों में किस्मत आजमाई पर वहां कमाल नहीं दिखा सके, फिर राजनीति का रुख किया। 36 वर्षीय चिराग ने वर्ष 2014 में पहली बार चुनाव लड़ा और जमुई से 16वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में चुने गए।

चिराग ने जिस दौर में राजनीति में कदम रखा उस वक्त उनके पिता की लोकजनशक्ति पार्टी (लोजपा) की हालात बिहार में कुछ खास अच्छी नहीं थी। पर 2014 के चुनाव से पहले लोजपा का भाजपा के साथ गठबंधन हुआ। इसमें लोजपा को राज्य में सात सीटें मिलीं जिसमें पार्टी ने छह सीटों पर जीत हासिल की। माना जाता है कि लोजपा का भाजपा के साथ जाने के फैसले के पीछे चिराग ही थे जिसका पार्टी को बड़ा लाभ हुआ। बिहार में लोकसभा चुनाव को लेकर एनडीए के दलों के बीच सीट बंटवारा हो चुका है। जेडीयू और भाजपा 17-17 सीटों पर जबकि लोजपा छह सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

पार्टी की बागडोर चिराग के हवाले : चिराग को लोकजनशक्ति पार्टी में संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है। रामविलास पासवान ने उन्हें पार्टी से जुड़े तमाम फैसले लेने के लिए अधिकृत कर दिया है। दूसरे शब्दों में कहें तो पार्टी की बागडोर अब उनके ही हाथ में है। उन पर अब पिता से मिली सियासी विरासत को आगे ले जाने की जिम्मेदारी है।

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