शीला दीक्षित ‘आप’ से गठबंधन के पक्ष में नहीं

नई दिल्लीः कांग्रेस की वरिष्ठ नेता तथा दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित अगले लोकसभा चुनावों में दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) से चुनावी गठबंधन करने के खिलाफ हैं। कुछ दिन पूर्व उन्होंने बयान दिया था कि गठबंधन को लेकर आलाकमान फैसला करे। तब उनके रुख को सकारात्मक माना जा रहा था, लेकिन इस बीच दिल्ली विधानसभा में राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने के प्रस्ताव प्रकरण से स्थितियां बदल गई हैं। खबर है कि घटना से आहत दीक्षित ऐसे किसी प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेंगी।

कांग्रेस के ‘आप’ से समर्थन की अटकलें काफी समय से चल रही हैं, लेकिन किसी भी पक्ष की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं की गई। इसी महीने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जब चंद्रबाबू नायडू के बुलावे पर विपक्षी दलों की बैठक में शामिल हुए थे, तो यह अटकलें लगाई गई कि दिल्ली में भी ऐसा कोई गठबंधन हो सकता है। इसके चार दिन पूर्व शीला दीक्षित ने कहा था कि इस बारे में कांग्रेस हाईकमान फैसला करे। हालांकि, उनका यह बयान एक सामान्य प्रक्रियागत जवाब था, लेकिन राजनीति में बोलने का मतलब निकाला जाता है और यह समझा जाने लगा कि वह गठबंधन की पक्षधर हैं।

इसी बीच दिल्ली विधानसभा में भारत रत्न की वापसी से जुड़े प्रस्ताव को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाराज हैं। खुद शीला दीक्षित भी इस घटना से काफा आहत हैं। ऐसी स्थिति में यदि भविष्य में कभी इस मुद्दे पर बात आगे बढ़ाई जाती है, तो दीक्षित इसका समर्थन नहीं करेंगी। चूंकि शीला दीक्षित तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। इसलिए समझा जाता है कि कांग्रेस द्वारा इस बारे में कोई भी फैसला उनसे पूछे बगैर नहीं लिया जाएगा।

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